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परम श्रद्धेय आचार्य

सुनील कृष्ण स्वामी जी महाराज

एक दिव्य जीवन यात्रा

राजस्थान की पवित्र भूमि नाहरखोहर (तहसील सिकराय, जिला दौसा) में एक धार्मिक श्रीवैष्णव ब्राह्मण परिवार में एक दिव्य आत्मा का जन्म हुआ।

इस पवित्र परिवार के मुखिया श्री नवल किशोर स्वामी और माताश्री सीता देवी थे, जिनका जीवन भगवान की भक्ति, सेवा और सनातन धर्म की परंपराओं में समर्पित था। परिवार में प्रतिदिन ठाकुर जी की सेवा और भगवान हनुमान जी की पूजा की जाती थी।

हनुमान जी का दिव्य संकेत

सुनील कृष्ण स्वामी जी महाराज के जन्म से पहले एक अद्भुत घटना घटी।

एक रात श्री नवल किशोर स्वामी जी को स्वप्न में हनुमान जी महाराज के दर्शन हुए। स्वप्न में हनुमान जी ने आशीर्वाद देते हुए कहा—

“तुम्हारे घर जो बालक जन्म लेने वाला है, वह अत्यंत बुद्धिमान और भाग्यशाली होगा।
वह देश-विदेश में धर्म की ध्वजा फहराएगा और मानव जाति के हृदय में भक्ति का दीप प्रज्वलित करेगा।”

कुछ समय बाद वही दिव्य वाणी सत्य सिद्ध हुई और उस पावन परिवार में जन्म हुआ सुनील कृष्ण स्वामी जी महाराज का।

बचपन से ही भक्ति और ज्ञान की ओर

बाल्यकाल से ही स्वामी जी का मन भगवान की भक्ति और आध्यात्मिक जीवन की ओर आकर्षित था।

मात्र 5 वर्ष की आयु में उन्होंने शिक्षा और संस्कार के लिए वृंदावन के पवित्र गुरुकुल में प्रवेश लिया। इतनी छोटी आयु में घर और माता-पिता से दूर रहकर उन्होंने वेद, शास्त्र, श्रीमद्भागवत, रामायण और वैदिक परंपराओं का गहन अध्ययन किया।

ज्योतिष और वेदिक विद्या का अध्ययन

गुरुकुल में अध्ययन के दौरान सुनील कृष्ण स्वामी जी महाराज ने वैदिक ग्रंथों के साथ-साथ वैदिक ज्योतिष शास्त्र का भी गहन अध्ययन किया।

उन्होंने ग्रह-नक्षत्रों के प्रभाव, कुंडली विश्लेषण, दोष निवारण और वैदिक उपायों का ज्ञान प्राप्त किया। आज वे ज्योतिषीय मार्गदर्शन और वैदिक अनुष्ठानों के माध्यम से अनेक लोगों के जीवन की समस्याओं का समाधान बताते हैं और उन्हें धर्म और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं।

हनुमान जी की विशेष कृपा

सुनील कृष्ण स्वामी जी महाराज पर हनुमान जी महाराज की विशेष कृपा मानी जाती है।

उनका जीवन भगवान हनुमान की भक्ति में सदैव समर्पित रहता है। भक्ति और साधना के दौरान उन्हें कई बार हनुमान जी के दिव्य दर्शन भी प्राप्त हुए हैं, जो उनके जीवन की आध्यात्मिक शक्ति और प्रेरणा का स्रोत बने।

स्वामी जी हमेशा कहते हैं कि जो भी दिव्य प्रेरणा उन्हें साधना में प्राप्त होती है, वह उसे भक्तजनों तक पहुँचाते हैं ताकि लोगों को अपने जीवन की समस्याओं का समाधान और सही मार्ग मिल सके।

उनकी वाणी और मार्गदर्शन से अनेक लोगों को आध्यात्मिक शक्ति, विश्वास और जीवन में नई दिशा मिली है।

धर्म प्रचार और सेवा

शिक्षा पूर्ण करने के बाद सुनील कृष्ण स्वामी जी महाराज ने अपना जीवन पूरी तरह सनातन धर्म के प्रचार और मानव सेवा के लिए समर्पित कर दिया।

उन्होंने अनेक स्थानों पर—
    •    श्रीमद्भागवत कथा
    •    रामायण पाठ
    •    मंदिर प्रतिष्ठा महोत्सव
    •    वैदिक यज्ञ और अनुष्ठान
    •    ज्योतिष परामर्श और आध्यात्मिक मार्गदर्शन

के माध्यम से हजारों लोगों के जीवन में भक्ति और सकारात्मकता का प्रकाश फैलाया।

देश-विदेश में धर्म की ध्वजा

आज सुनील कृष्ण स्वामी जी महाराज भारत ही नहीं बल्कि विदेशों में भी सनातन धर्म का प्रचार कर रहे हैं।

विभिन्न देशों में जाकर वे मंदिर प्रतिष्ठा, श्रीमद्भागवत कथा और धार्मिक अनुष्ठानों के माध्यम से लोगों को भक्ति, संस्कार और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दे रहे हैं।

जीवन का संदेश

स्वामी जी का संदेश अत्यंत सरल और प्रेरणादायक है—

“मानव जीवन का सच्चा उद्देश्य भगवान की भक्ति, धर्म का पालन और मानवता की सेवा करना है।”

उनका जीवन इस सत्य का प्रमाण है कि जब कोई व्यक्ति अपने जीवन को भगवान और समाज की सेवा में समर्पित कर देता है, तो ईश्वर स्वयं उसके मार्ग को प्रकाशित कर देते हैं।

गुरुजी एआई

नमस्ते! मैं सुनील कृष्ण स्वामी जी का एआई अवतार हूँ। आज मैं आपका मार्गदर्शन कैसे कर सकता हूँ?
गुरुजी सोच रहे हैं...
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